ठीक १ वर्ष पहले मार्क भाई जुकेरबर्ग ने पोस्ट किया: बेटी का जन्म होने वाला है, उसके बाद 2 महीने की छुट्टी पर रहूँगा।
भारत में बच्चे के जन्म से पहले लिंग परिक्षण अपराध है, अमेरिका में नही।
फिर भारत में क्यों? क्योंकि, भारत में 64% एनजीओ विदेशों से पोषित हैं। हर एनजीओ का एजेंडा विदेशी अन्नदाता निर्धारित करते हैं। एनजीओ उन्ही मुद्दों को उठाते हैं जो अंग्रेजी आका चाहें। अमेरिका में सेक्स दर और सेक्स लाइफ सबसे ज्यादा कम है, ख़राब है।
भारत में बच्चे के जन्म से पहले लिंग परिक्षण अपराध है, अमेरिका में नही।
फिर भारत में क्यों? क्योंकि, भारत में 64% एनजीओ विदेशों से पोषित हैं। हर एनजीओ का एजेंडा विदेशी अन्नदाता निर्धारित करते हैं। एनजीओ उन्ही मुद्दों को उठाते हैं जो अंग्रेजी आका चाहें। अमेरिका में सेक्स दर और सेक्स लाइफ सबसे ज्यादा कम है, ख़राब है।
91 में जब भारत वैश्विक बाजार बना तब तक, हमें सपेरों का देश और असभ्य कहा जाता था। आज स्थिती बदली है, अब भारत के ही एक सपूत ने, ईस्ट इंडिया कंपनी को खरीद लिया। समय बदल गया हमारा।
ये बात खटकती है, अमेरिका और ब्रिटेन के साम्राज्यवादी सरकारों को, कि कल तक जो गुलाम था वो अब हमारी कम्पनीज का अधिग्रहण कर रहा है।
बार बार विज्ञापन, प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हमें अपमानित किया जाता है।
आजकल विज्ञापन आता है, भारत में 70% लोगों के खाने में प्रोटीन की कमी है। ऐसा कह के वो गो-माँस (प्रोटीन का सस्ता श्रोत) खाने की संस्तुति देते हैं। अगर सच में ऐसा होता तो, 40% (कम से कम) लोगों को टीबी हो चुकी होती।
आमिर खान, विदेशी पैसों के लालच में कहता है, भारत में टीबी का इलाज अच्छा नही है।
डेविड-कोलमैन का अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया, कहता है, भारत में 21% महिलायें तलाकशुदा हैं। भाई हमें तो पुरे मोहल्ले में एक नही नजर आई।
टाइम मैगज़ीन कहती है, भारत में 40% बच्चों को खाना नही मिलता। अबे 40% का मतलब भी जानते हो।
आजकल विज्ञापन आता है, भारत में 70% लोगों के खाने में प्रोटीन की कमी है। ऐसा कह के वो गो-माँस (प्रोटीन का सस्ता श्रोत) खाने की संस्तुति देते हैं। अगर सच में ऐसा होता तो, 40% (कम से कम) लोगों को टीबी हो चुकी होती।
आमिर खान, विदेशी पैसों के लालच में कहता है, भारत में टीबी का इलाज अच्छा नही है।
डेविड-कोलमैन का अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया, कहता है, भारत में 21% महिलायें तलाकशुदा हैं। भाई हमें तो पुरे मोहल्ले में एक नही नजर आई।
टाइम मैगज़ीन कहती है, भारत में 40% बच्चों को खाना नही मिलता। अबे 40% का मतलब भी जानते हो।
साहेब, मंगलयान की सफलता, अमेरिका की सॉफ्टवेयर वैली, बफैलो में 48% भारतीय निवेश, तेजी से बढ़ता स्वदेशी का चलन, आयुर्वेद और आपकी जागरूकता इनसे देखि नही जा रही है। हमारा देशप्रेम और प्रतिभा-पलायन का कम होना ऐसे ही है जैसे अंग्रेजों की छाती पर साँप लोट रहा हो।
आयुर्वेद की निंदा और रामदेव को आये दिन प्रताड़ित करने के पीछे आयुर्वेद का अचूक इलाज ही है। अगर आयुर्वेद का दीवानापन पुरे देश पे छा गया तो, अमेरिका की vaccination और अलोपथी की कमाई रुक जायेगी।
फिर भी, यही कहना चाहूँगा:
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी।
आइये लिखिए और जगाइए सोये हुए विशाल जनमानस को। आप गुरु बनिए, विश्वगुरु भारत बने।

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