मोहम्मडियन

हमारे इधर मुसलमान को ‘जोल्हा’ या सीधे-सीधे ‘मियां’ ही कहते है। .. कहीं-कहीं ‘मोहम्मडियन’ भी कहते है।.. लेकिन ये मुस्लिम,मोहम्मडियन क्या होता हमें नहीं मालुम था.. हम तो बस ‘जोल्हा’ या ‘मियां’ ही जानते थे/है। .. इनके पहनावे या शक्ल देख के ही पहचान जाते कि हाँ ये जोल्हा है.. हालाँकि इनसे हमारी कोई जाती दुश्मनी नहीं है लेकिन ‘जोल्हा’ बड़ा अजीब तरीके से बोलते थे.. भग बे जोल्हा! सारहे सुरजाही बोकर! .. ऐसा क्यों बोलते थे/है उसका कोई कारण नहीं मालुम.. हम तो बस इनके व्यवहार और क्रियाकलाप ही देखते थे.. इनके भगवान कौन,अल्लाह कौन,मोहम्मद कौन? .. रत्ती भर भी कुछ पता नहीं.. बस चोंगा से जब अजान की आवाज़ सुनाई देती थी तो बस पहले के ही कुछ शब्द पकड़ में आते थे.. “अल्ल्लाहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् हुआआआआआ अकबर अल्लल्लाआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…!!” .. बस यही। .. इसके आगे कुछ भी पल्ले नहीं पड़ता था.. अगर हम गाय,बकरी चराते हुए चोंगे से अजान सुनते और जब ये आवाज सुनाई देती ‘अल्ल्लाह हुआआआ अकबर अल्ल्लाआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…’ .. तो हम सब चरवाहे एक ही सुर में चिल्लाते , “की भेलो जोल्लल्लाआह्ह्ह्ह्ह्!!’ … और इसके अलावे एक दो कहानियां थी जो सुनने में आती थी मुसलमानों के अल्लाह के संबंध में .. वो ये कि एक बार बजरंगबली और अल्लाह लड़ रहे थे.. बहुत भयंकर लड़ रहे थे.. लड़ते-लड़ते अल्लाह भाग खड़ा हुआ और एक कुंवे में जा के छुप गया.. बजरंगबली जब गदा लेकर वहाँ पहुंचे तो वो आस-पास कहीं दिखाई नहीं देने लगा.. लेकिन वे कुंवे को बड़ी गौर से देख रहे थे.. अनुमान लगाये कि वो इस कुंवे के इर्द-गिर्द ही छुपा हुआ है.. इतने में वहाँ मौजूद गिरगिट ने मुंडी हिलाते हुए इशारा किया कि हाँ वो यहीं छिपा हुआ है.. और तब बजरंगबली उस कुंवे में कूद गए.. वहाँ फिर खूब मारे.. लेकिन तभी ऊपर से एक मकड़ी ने कुंवे को अपनी जाल से ढंक दिया.. और तब से बजरंगबली उसी कुंवे में कैद है.. और वो कुंवा मक्का में है.. अगर कोई सच्चा हिन्दू उस कुंवे में गंगा जल चढ़ा देगा तो उसी दिन सारे मुसलमान का अंत समझो।


तो ये कहानी सुनी हुई थी .. और उनके अल्लाह के बारे में बस इतना ही जानता था। .. 
बचपन की एक घटना.. मेरे गांव में एक मौलाना डाक्टर है.. अहमद अली। .. गांव के लगभग सभी जन उनके यहाँ ही जाते है इलाज को .. एक बार मेरे छोटे भाई की तबियत खराब हुई.. पापा के साथ में मैं भी गया उस मौलाना के घर.. अंदर भाई को मौलाना देख रहा था और मैं बाहर बैठा हुआ था.. बैठे-बैठे मुझे दीवार के ऊपर कोने में बहुत से मकड़ी के जाले दिखाई दिए.. सौभाग्य से कोने में डंडा भी रखा हुआ था.. मैंने डंडा उठाया और जले साफ़ करना शुरू कर दिया.. वो डॉक्टर जब अंदर से मुझे ये करते हुए देखा तो मेरे ऊपर भड़क गया.. मेरे बप्पा को बोलने लगा ‘शुकर.. क्या कर रहा तुम्हारा लड़का.. बताओ इसे।“ .. बप्पा भी घुड़क दिए हमको और बोले कि ‘ई लोग मकड़ी को नहीं मारते।‘ .. मुझे तो घण्टा कुछ पल्ले नहीं पड़ा.. बाद में ये कहानी जब सुना तो मालुम हुआ क्यों नहीं मारते।
लेकिन जोल्हा लड़कों को देखता था कि गधे गिरगिट को खूब मारते थे।.. कभी-कभी इसके कारण नोक-झोक भी खूब हुए।
तो जोल्हा और उनके भगवान के बारे में बस इतना ही जानते थे… और अब भी लगभग लोग इतना ही जानते है.. कहाँ का इस्लाम किधर का इस्लाम घण्टा नहीं कुछो पता। … कुरान,हदीस तो बहुत दूर की कौड़ी हुई।
वहीँ इसके उलट उन्हें हमारे भगवानों के बारे में हमारे जितना ही नॉलेज.. हम भी अब तक कोनो धार्मिक किताब नहीं पढ़े है.. बस टीवी में जेतना देखे बस ओतना ही अपने धर्म के बारे में ज्ञान है..(अब कुछ-कुछ पढ़ने लगा हूँ) .. मौलाना के घर में टीवी थी तो सब उसके घर में महाभारत रामायण देखने जाया करते थे.. और भी जितने मियां के यहाँ टीवी थे वो लोग भी बस हमारे ही सीरियल देखा करते थे.. ऑप्शन नहीं था कुछ। .. अब उनमें और हममें क्या फर्क होता कि हम तो बस टीवी देखे और बात खत्म .. गर मंदिर गए तो बस पूजा किये और बात खत्म .. वहीँ जोल्हा लोग इधर टीवी देखते और उधर मदरसे जाते और अली,बे,ते,से,ने के साथ-साथ अल्लाह-अल्लाह भी खूब पढ़ते और हमारे भगवानों के बारे में नकारात्मकता भी। ..
वो हमारे जितना ही हिन्दू धर्म को जानते और साथ-साथ में इस्लाम भी.. वो ऐसी कड़ियों को पकड़ते और इस्लाम से रिलेट कर के हमको नीचा दिखाने की हर सम्भव कोशिश करते.. हालाँकि ये जहाँ मानयोरिटी में रहेंगे वहां तो खुल के नहीं बोलेंगे.. लेकिन मेजोरिटी में आते ही एक भी मौका नहीं गँवायेंगे हमारे भगवानों को नीचा दिखाने में और हिन्दू धर्म को घटिया साबित करने में।
वहीँ इसके विपरीत हमें क्या मालुम उसके मजहब के बारे में?? .. उत्तर है .. घण्टा!! .. निल बट्टा जीरो। 
बस जो क्रिया-कलाप देखते है बस उसी से अंदाज लगाते है कि इनके मज़हब में क्या होगा?? ..
खुद ही विचारिये.. जब इंटरनेट की पहुँच नहीं थी.. बोले तो आज से 8-10 साल पहले.. तब आप इस्लाम को कितना जानते थे.. अजान के अल्लाह के अलावा आप कितना जानते थे अल्लाह के बारे में.. मोहम्मद क्या था नहीं था, कितना जानते थे उसके बारे में? .. सोचिये.. और अब तुलना कीजिये कि अब हम कितना जान रहे है उनके मज़हब के बारे में!? 
वे मदरसों में लिंग,योनि का अपने हिसाब से वर्णन करते थे/हैं .. कृष्ण,राम के बारे में उलटी-सीधी व्याख्या कर हमें नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे/हैं .. आज इंटरनेट बाबा की कृपा है कि हम कुरान,हदीस,मोहम्मद को लेकर सैकड़ों प्रश्नों की बौछार कर सकते हैं.. वे भले ही बोले कि गलत व्याख्या कर रहे हो.. तो साला तुम कौन सा सही व्याख्या करते हो बे? .. जब तक तुम सही व्याख्या नहीं करोगे हम तुम्हारी बखिया उधेड़ने में कोई रहमदिली नहीं बरतेंगे। 
आज जोल्हों के उच्चटपन और किरकिरी का कारण भी यही है.. कि अब हम उल्टा ज़वाब दे रहे है .. तुम रामायण,महाभारत और अन्य ग्रन्थ जिस भावना से पढ़ते और देखते हो उससे भी बुरे तरीके से हम कुरान और हदीस को देखेंगे। .. झल्लाहट ये है कि कुरान पढ़ के भी लोग काफिराना हरकत कर रहे है।
समय का तकाज़ा ये है अब इन्हें इनके व्यवहार व क्रियाकलापों से ही न मारे बल्कि इनके ग्रथों के पन्नों से भी चेप के मारे। .. बहुत एकतरफा किताबी मार झेल लिए हम... अब तुम भी झेलो। 
 जोल्हा से मुसलमान बनने तक का सफर पूरे मनोयोग से सुनाएंगे हम।
गंगवा
खोपोली से।

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