ये मोदी सरकार जब से बनी मैं हमेशा यही सोचता था कि आखिर क्या सोच के एक 12वी पास औरत को मोदी जी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय जैसे विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया ?
वो विभाग जिसे भारत की शिक्षा व्यवस्था सम्हालनी है उसमे क्या सोच के स्मृति इरानी को बैठाया ।
अमित शाह जानते थे कि स्मृति इरानी अमेठी में राहुल से हार जायेंगी । फिर भी उन्हें अमेठी से लडवाया । उन्हें जान बूझ के अमेठी से हरवाया गया ।
देश में मोदी लहर थी । उन्हें कहीं से जितवाया भी जा सकता था । दो seats से भी लडवाया जा सकता था । अमेठी से हार भी जाती तो कहीं और से जीत जाती ?
राहुल से हारी हुई , वरीयता क्रम में मने seniority में तीसरी चौथी लाइन की एक जूनियर नेत्री ......... पर high profile नेत्री ........... को HRD का cabinet Minister क्यों बनाया ?
क्यों ?
अपने जीवन में Psychology का स्टूडेंट होने के नाते , और अपनी professional life में Wrestling मने कुश्ती ........ मने पुराने जमाने का , मने महाभारत काल के मल्ल युद्ध का प्रशिक्षक होने के नाते और Sports Psychology का छात्र और प्रवक्ता होने के नाते मैंने युद्ध कौशल में हार और जीत के मनोविज्ञान का बड़ी बारीकी से अध्ययन किया है । कुश्ती या boxing जैसी games में आम तौर पे छोटे वज़न के योद्धा बहुत तेज़ फुर्तीले और technical होते हैं पर जो audience value heavy weights की होती है वो छोटे योद्धाओं की नहीं । दंगल में जहां बड़े पहलवान की कुश्ती 2 लाख पे होती है वहीं छोटे और मझोले 2 - 4 हज़ार को तरसते हैं । कई बार हल्का पहलवान उस हाथी जैसे मोटे पहलवान से बहुत अच्छा होता है फिर भी बेचारे को कोई नहीं पूछता । समझदार बड़ा पहलवान दंगल में भूल के भी अपने से हलके पहलवान से नहीं लड़ता । क्योंकि उसको पटक लेने से भी कोई इज्ज़त नहीं मिलती । पर भगवान् न करे , अगर वो बराबर लड़ गया , या उसने हरा दिया तो बड़े पहलवान का तो करियर चौपट हो जाता है । इसलिए बड़ा पहलवान कभी भी छोटे से नहीं लड़ता ।
वो विभाग जिसे भारत की शिक्षा व्यवस्था सम्हालनी है उसमे क्या सोच के स्मृति इरानी को बैठाया ।
अमित शाह जानते थे कि स्मृति इरानी अमेठी में राहुल से हार जायेंगी । फिर भी उन्हें अमेठी से लडवाया । उन्हें जान बूझ के अमेठी से हरवाया गया ।
देश में मोदी लहर थी । उन्हें कहीं से जितवाया भी जा सकता था । दो seats से भी लडवाया जा सकता था । अमेठी से हार भी जाती तो कहीं और से जीत जाती ?
राहुल से हारी हुई , वरीयता क्रम में मने seniority में तीसरी चौथी लाइन की एक जूनियर नेत्री ......... पर high profile नेत्री ........... को HRD का cabinet Minister क्यों बनाया ?
क्यों ?
अपने जीवन में Psychology का स्टूडेंट होने के नाते , और अपनी professional life में Wrestling मने कुश्ती ........ मने पुराने जमाने का , मने महाभारत काल के मल्ल युद्ध का प्रशिक्षक होने के नाते और Sports Psychology का छात्र और प्रवक्ता होने के नाते मैंने युद्ध कौशल में हार और जीत के मनोविज्ञान का बड़ी बारीकी से अध्ययन किया है । कुश्ती या boxing जैसी games में आम तौर पे छोटे वज़न के योद्धा बहुत तेज़ फुर्तीले और technical होते हैं पर जो audience value heavy weights की होती है वो छोटे योद्धाओं की नहीं । दंगल में जहां बड़े पहलवान की कुश्ती 2 लाख पे होती है वहीं छोटे और मझोले 2 - 4 हज़ार को तरसते हैं । कई बार हल्का पहलवान उस हाथी जैसे मोटे पहलवान से बहुत अच्छा होता है फिर भी बेचारे को कोई नहीं पूछता । समझदार बड़ा पहलवान दंगल में भूल के भी अपने से हलके पहलवान से नहीं लड़ता । क्योंकि उसको पटक लेने से भी कोई इज्ज़त नहीं मिलती । पर भगवान् न करे , अगर वो बराबर लड़ गया , या उसने हरा दिया तो बड़े पहलवान का तो करियर चौपट हो जाता है । इसलिए बड़ा पहलवान कभी भी छोटे से नहीं लड़ता ।
काश चुनाव में भी आप अपने प्रतिद्वंदी खुद चुन सकते ।
अमेठी में मोदी / अमित शाह ने एक बहुत जूनियर पहलवान को राहुल से भिड़ा दिया । चुनाव के दौरान गाँधी परिवार ने स्मृति इरानी के लिए कहा भी ......... who is Smriti Irani ....
और चुनाव बाद उसी हारी हुई junior Smriti Irani को HRD minister बना दिया । हर 3 महीने पे उसे अमेठी भेज देते हैं , छाती पे मूंग दलने ? मोदी जानते थे कि एक मात्र मंत्रालय जिसमे हमेशा secular brigade ......aka Left , congress लालू भालू कचालू से सींग फंसे रहेंगे ........ VCs को ले के , syllabus को ले के , इतिहास की किताबों को ले के , इतिहास के पुनर्लेखन को ले के .........यही एक मंत्रालय है , शिक्षा मंत्रालय जहां सबसे ज़्यादा घमासान होता है .......... सेक्युलर brigade के साथ ।
अटल सरकार में भी होता था । अब भी हो रहा है ।
जब स्मृति ईरानी ने संसद में गरजना शुरू किया तो दोनों माँ बेटा संसद छोड़ भाग खड़े हुए । जानते हैं क्यों ? जब कोई छोटा पहलवान बड़े पहलवान की पीठ पे चढ़ जाता है और घुटना गर्दन पे रख लेता है तो डूब मरने की नौबत आ जाती है ।
आपको क्या लगता है ? कल बहस का जवाब यदि मोदी राजनाथ जेटली या सुषमा जी दे रही होती तो भी क्या माँ बेटा संसद छोड़ भागते ?
नहीं भागते ..........
पर सामने स्मृति ईरानी थी ....... बेहद जूनियर नेत्री ........ सीरियल में काम करने वाली एक अभिनेत्री ........ सिर्फ 12वीं पास ........ और congress के सबसे बड़े दो नेताओं को उलटा लटका के बकरे की माफिक छील रही हो ........ या अल्लाह ....... इतनी बेईज्ज़ती?
पिछली NDA में HRD मुरली मनोहर जोशी के पास था जो भाजपा में तीसरे सबसे वरिष्ठ नेता थे । कहाँ जोशी जी और कहाँ कल की लौंडिया स्मृति इरानी ।
और कल पूरी दुनिया देख रही थी जब वो पूरे विपक्ष को पटक पटक के धो रही थी ।
नंगा कर के पीट रही थी । जहां पिटाई होने वाली हो वहाँ से भाग जाना चाहिए । street fight का ये पहला सिद्धांत है । पर street fight का । संसद का नहीं ।
मोदी के छोटे से पहलवान ने विपक्ष के दो सबसे बड़े पहलवानों को मैदान से खदेड़ दिया । डरे हुए पिटे हुए कुत्ते को पूंछ टांगों में दबा के पेट दिखाते भागते देखा है ?
कल ऐसे भागे दोनों माँ बेटा .........
और चुनाव बाद उसी हारी हुई junior Smriti Irani को HRD minister बना दिया । हर 3 महीने पे उसे अमेठी भेज देते हैं , छाती पे मूंग दलने ? मोदी जानते थे कि एक मात्र मंत्रालय जिसमे हमेशा secular brigade ......aka Left , congress लालू भालू कचालू से सींग फंसे रहेंगे ........ VCs को ले के , syllabus को ले के , इतिहास की किताबों को ले के , इतिहास के पुनर्लेखन को ले के .........यही एक मंत्रालय है , शिक्षा मंत्रालय जहां सबसे ज़्यादा घमासान होता है .......... सेक्युलर brigade के साथ ।
अटल सरकार में भी होता था । अब भी हो रहा है ।
जब स्मृति ईरानी ने संसद में गरजना शुरू किया तो दोनों माँ बेटा संसद छोड़ भाग खड़े हुए । जानते हैं क्यों ? जब कोई छोटा पहलवान बड़े पहलवान की पीठ पे चढ़ जाता है और घुटना गर्दन पे रख लेता है तो डूब मरने की नौबत आ जाती है ।
आपको क्या लगता है ? कल बहस का जवाब यदि मोदी राजनाथ जेटली या सुषमा जी दे रही होती तो भी क्या माँ बेटा संसद छोड़ भागते ?
नहीं भागते ..........
पर सामने स्मृति ईरानी थी ....... बेहद जूनियर नेत्री ........ सीरियल में काम करने वाली एक अभिनेत्री ........ सिर्फ 12वीं पास ........ और congress के सबसे बड़े दो नेताओं को उलटा लटका के बकरे की माफिक छील रही हो ........ या अल्लाह ....... इतनी बेईज्ज़ती?
पिछली NDA में HRD मुरली मनोहर जोशी के पास था जो भाजपा में तीसरे सबसे वरिष्ठ नेता थे । कहाँ जोशी जी और कहाँ कल की लौंडिया स्मृति इरानी ।
और कल पूरी दुनिया देख रही थी जब वो पूरे विपक्ष को पटक पटक के धो रही थी ।
नंगा कर के पीट रही थी । जहां पिटाई होने वाली हो वहाँ से भाग जाना चाहिए । street fight का ये पहला सिद्धांत है । पर street fight का । संसद का नहीं ।
मोदी के छोटे से पहलवान ने विपक्ष के दो सबसे बड़े पहलवानों को मैदान से खदेड़ दिया । डरे हुए पिटे हुए कुत्ते को पूंछ टांगों में दबा के पेट दिखाते भागते देखा है ?
कल ऐसे भागे दोनों माँ बेटा .........
अब मोदी का ये छोटा पहलवान इनको हमेशा खदेड़ेगा । आ रहा है UP का चुनाव । और उसके बाद फिर आयेगा 2019 ........ उसमे फिर अमेठी से खदेड़ेगी राहुल को ......... रोहित वेमुला और JNU प्रकरण में कूद के राहुल गाँधी स्वयं ही Ring में स्मृति इरानी के सामने आ कूदे ......... और जब उसने लखेदा तो भाग खड़े हुए ?
आज के बाद जब भी संसद में कुश्ती होगी ........ स्मृति इरानी ताल ठोक के कूद पड़ेगी ......... अरे पहले मुझसे निपट लो , पहले मुझे पटक लो ......... फिर हाथ बढ़ाना उस्ताद जी ( मोदी / राजनाथ / जेटली / सुषमा ) की तरफ ।
Moral of the story : अपने से छोटे पहलवान से कभी मत भिड़ो .......... भोत बेइज्जती होती है .........

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